पुश पुल एम्पलीफायर क्या है? | कार्यप्रणाली, लाभ और हानि

हेलो दोस्तों, इस आर्टिकल में आपको बताने वाला हूं कि पुश पुल्ल एम्पलीफायर की कार्यप्रणाली, इसके लाभ और हानि( push pull amplifier working in hindi),(push pull advantage and disadvantages)| तो चलिए शुरू करते हैं

पुश पुल्ल पावर एम्पलीफायर दो प्रकार के होते है|

पुश-पुल्ल-एम्पलीफायर-की-कार्यप्रणाली

Class A Push-Pull Amplifier-इस प्रवर्धक में दो प्रवर्धक T1 तथा T2 का प्रयोग किया गया है। दो प्रवर्धक T1 एव T2 को identical लिया गया है। इनके emitter terminals को आपस में connect किया गया है। Transistor के base और collector को I/P और O/P transformer (Tr1 and Tr2) के opposite ends पर connect किया गया है। दोनों transformer Tr1 एवं Tr2  centre tapped transformer हैं।

प्रतिरोध R1 व R2 biasing arrangement उपलब्ध कराते हैं। Load को transformer Tr2 की secondary windings के across connect किया गया है। Amplifier द्वारा load को अधिकतम शक्ति deliver करने के लिए Tr2  (O/P transformer) के turn ratio इस प्रकार लिए जाने चाहिए कि ट्रांजिस्टर का output impedance, load impedance से match होना चाहिए।

पुश-पुल्ल-एम्पलीफायर-की-कार्यप्रणाली

Read moreएंपलीफायर के प्रचालन बिंदु क्या होता है?

पुश पुल्ल एम्पलीफायर की कार्यप्रणाली(Operation)

धारा ic1 एवं  ic2 transformer (Tr) की primary के द्वारा विपरीत दिशा में प्रवाहित होती हैं। ic1 एवं ic2 magnitude में बराबर होती हैं। अतः यहां transformer (Tr2) की primary में collector Current का कोई DC component नहीं होता है। जब input में AC signal दिया जाता है तो +ve half cycle के दौरान transistor अधिक +ve बन जाता है जबकि T2 less-ve बनता है। Collector current हमेशा base current के साथ same plate में रहती है।

इस प्रकार collector currenti ic1 बढ़ती है तथा ।c2 घटती है। यह current (ic1 तथा ic2) centre tapped O/P transformer (Tr2) की primary के विपरीत दिशा में प्रवाहित होती है। इस कारण load में induced होने वाले वोल्टेज का magnitude collector current के difference (ic1-ic2) क अनुक्रमानुपाती होता है।इसी प्रकार input AC signal के -ve half cycle में load में induced होने वाले वोल्टेज का magnitude collector current के अंतर (ic2-ic1) के अनुक्रमानुपाती होगा।

जब ic1 बढ़ती है तब ic2 घटती है तथा जब ic2 बढ़ती है तो ic1 घटती है। अतः एक ट्रांजिस्टर conduction में pushed और दूसरा ट्रांजिस्टर out of conduction में pulled करता है। इसलिए इस amplifier का नाम push pull amplifier है।

push pull amplifier के लाभ

(i)  सम harmonics cancel होने के कारण इसमें distortion बहुत कम होता है।

(ii) Transistor T1 तथा T2 के collector current के DC component विपरीत दिशा में प्रवाहित होते हैं। अतः इसमें किसी भी प्रकार का कोई DC magnetization या core saturation नहीं होता है। (iii) जब कोई इनपुट signal नहीं दिया जाता, power dissipation शून्य होता है।

(iv) ट्रांसफॉर्मर की वजह से impedance material सम्भव है।

 

push-pull amplifier की हानियाँ

(i) दो ट्रांसफॉर्मर उपयोग होने का कारण इसका परिपथ बहुत bulky एवं costly है।

(ii) – इसमें दो 100% identical transistor की आवश्यकता होती है। यह सम्भव नहीं है।

(iii) प्रत्येक प्रवर्धक की अधिकतम क्षमता 50% होती है और दो transistor की सम्पूर्ण क्षमता भी 50% होती है।

(iv) Power बहुत ज्यादा व्यय होता है।

अब आप जान गए होंगे कि पुश पुल्ल एम्पलीफायर की कार्यप्रणाली, इसके लाभ और हानि( push pull amplifier working in hindi), push pull amplifier के लाभ, push pull amplifier की हानियाँ, इस विषय में आपको अच्छी तरह से जानकारी मिली हो गई होगी|

उम्मीद करता हूं मेरे द्वारा दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी| अगर आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव हो तो मुझे कमेंट करके बता सकते हो मैं आपके कमेंट का जरूर जवाब दूंगा इस आर्टिकल को आपके दोस्त के साथ में भी शेयर कर सकते हो |

 

3 thoughts on “पुश पुल एम्पलीफायर क्या है? | कार्यप्रणाली, लाभ और हानि”

Leave a Comment